Javed Akhatar Ki Shayari (Hindi Urdu Poetry by Javed Akhatar)

जावेद अख्तर वो नाम हैं जिसे भारत ही नहीं देश विदेश में भी जाना जाता हैं.
जावेद अख्तर जी का जन्म ग्वालियर में 17 जनवरी 1945 को में हुआ था। 
फिल्मों के गीतकार और पटकथा लेखक  के रूप में साथ ही वो सामाजिक कार्यकर्त्ता के रूप में भी एक प्रसिद्ध हस्ती मानी जाती हैं.
यहाँ पर जावेद अख्तर जी की लिखी शायरी उपलब्ध है जिन्हे आप वन क्लिक में कॉपी करके अपना स्टेटस बना सकते है और दूसरो के साथ शेयर भी कर सकते है |

नहीं मिलते हो मुझसे तुम,
तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ

-Javed Akhtar Ji

नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

-Javed Akhtar Ji

क्यूं मेरे साथ कोई और परेशान रहे
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे
ज़िन्दगी का ये सफ़र तुमको तो आसान रहे
हमसफ़र मुझको बनाओगी तो पछताओगी

-Javed Akhtar Ji

ख़ुदकुशी क्या ग़मों का हल बनती
मौत के अपने भी सौ झमेले थे

-Javed Akhtar Ji

किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी,
इतनी कसैली बात लिखूं
शेर की मैं तहज़ीब निभाऊं
या अपने हालात लिखूं

-Javed Akhtar Ji

ज़रा मौसम तो बदला है,
मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में
अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर
ग़ुबार-ए-ग़म है
कम बे-शक पर उन को
मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे

-Javed Akhtar Ji

वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ
हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है

-Javed Akhtar Ji

इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है

-Javed Akhtar Ji

लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं
मैंने उस हाल में जीने की क़सम खाई है

-Javed Akhtar Ji

खामोशियाँ कर दे बयाँ तो अलग बात है
कुछ दर्द ऐसे भी है जो लफ्जों में उतारे नहीं जाते

-Javed Akhtar Ji

मैं भूल जाऊँ तुम्हें अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ
कि तुम तो फिर भी हक़ीक़त हो कोई ख़्वाब नहीं
यहाँ तो दिल का ये आलम है क्या कहूँ
कमबख़्त !
भुला न पाया ये वो सिलसिला जो था ही नहीं
वो इक ख़याल
जो आवाज़ तक गया ही नहीं
वो एक बात
जो मैं कह नहीं सका तुमसे
वो एक रब्त
जो हममें कभी रहा ही नहीं
मुझे है याद वो सब
जो कभी हुआ ही नहीं

-Javed Akhtar Ji

कभी यूँ भी तो हो…
ये बादल ऐसा टूट के बरसे,
मेरे दिल की तरह मिलने को तुम्हारा दिल भी तरसे,
तुम निकलो घर से …
कभी यूँ भी तो हो…
तनहाई हो, दिल हो,
बूँदें हो, बरसात हो,
और तुम आओ …

-Javed Akhtar Ji

क्‍यों डरें ज़िन्‍दगी में
क्‍या होगा ?
कुछ ना होगा तो
तज़रूबा होगा
हँसती आँखों में झाँक कर देखो
कोई आँसू कहीं छुपा होगा

-Javed Akhtar Ji

 ये दुनिया भर के झगड़े
घर के किस्‍से काम की बातें
बला हर एक टल जाए,
अगर तुम मिलने आ जाओ

-Javed Akhtar Ji

 मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा
वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूँ हारा

-Javed Akhtar Ji

ये बता दे मुझे ज़िन्दगी
प्यार की राह के हमसफ़र
किस तरह बन गये अजनबी
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी

-Javed Akhtar Ji

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया

-Javed Akhtar Ji

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